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रविवार, अप्रैल 10, 2011

"भ्रष्ट अचार" बनाने की विधि

आप ब्लॉग बनाने के बारे में विभिन्न-विभिन्न पोस्टों से सीख रहे है. पिछले दिनों एक ईमेल द्वारा "भ्रष्ट अचार" बनाने की विधि प्राप्त हुई.आज मुझे "भ्रष्ट अचार" बनाने की विधि की प्रकाशित करते बहुत ख़ुशी हो रही है और मेरा विचार उपरोक्त अचार का सेवन अगर आप अपने बच्चों को खिलाएंगे और परिवार में प्रयोग लायेंगे. तब आपके घर में धन-दौलत के साथ ही मीडिया और जांच अधिकारीयों की कमियों से जूझना नहीं होगा.आप भी खाईये और दूसरों को भी खिलाईये सुप्रसिध्द भ्रष्ट अचार
भ्रष्ट अचार (मिश्रित अचार) बनाने की विधि

प्रथम चरण :- सबसे पहले सुरेश कलमाड़ी, शीला दीक्षित, ए.राजा, दिग्विजय सिंह व अन्य(कई है जिस किसी के बारे में आपने सुन रखा है) उन्हें अच्छी तरह से धूप में सुखा लें, ध्यान रहे एक बूंद भी नमी (ईमानदारी) ना बचे.
दूसरा चरण :- फिर इसमें ध्यान से सही मात्रा में निम्न मसाले डालें. हल्दी (करुणानिधि), लाल मिर्च (ममता बेनर्जी), जीरा (कोमनवेल्थ गेम्स कमेटी), धनिया (नीरा राडिया), मेथी (मायावती), सौंफ (मुलायम सिंह), अजवायन (लालू प्रसाद यादव), मंगरैल (जयललिता), नमक (सोनिया गांधी) बाकी और भी मसाले अपने स्वाद अनुसार आप और डाल सकते हैं.
तीसरा चरण :- सभी मसलों एवं मुख्य पदार्थो को एक साथ सही मात्रा में अपने स्वादानुसार मिलाकर सरसों का तेल (मनमोहन सिंह) में डूबाकर धूप(यू.पी.ए-2) में  सुखाये.
निष्कर्ष :- लीजिये विगत सात वर्षो से विश्व प्रसिध्द भ्रष्ट अचार बनकर तैयार है. इस अचार का निर्माता : हरेक भारतीय मतदाता (जनहित में जारी)

4 टिप्‍पणियां:

  1. जैन साहब सचमुच बहुत अचार बना लेते हो आप तो वाह मजा आ गया हमारे यहाँ लोकल मार्केट में तो ये खूब बिक सकता है सोचता हूँ इसकी डीलरशिप ले लूं पर कृपया इस इतने बढ़िया ब्रांड भ्रष्ट अचार के लिए किस्से संपर्क करू !
    कृपया जरूर बताईयेगा मैं इन्तजार में रहूंगा वैसे भी आजकल एक इसी तरह के बिजनेश की तलाश में हूँ मैं भी !
    www.krantikarideshsevak.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. वाह शानदार तरीके से आचार बनाकर धोया है आपने इन भ्रष्टाचारियों को...

    उत्तर देंहटाएं
  3. मैं हूँ तो शाकाहारी मगर मांस भी खा सकता हूँ अगर इनका मिले तो कैसे विगत 10 वर्षों से कांग्रेस मे जो इतने पशु आ गये है कृपया इन्हें कटवा कर विदेशों मे भेजने की अगर व्यवस्था हो सकती है तो डिब्बा बन्द मे भिजवा दे इस कार्य के लिए आपको भारतीय बूचडों का पूरा सहयोग मिलेगा
    जयहिन्द

    उत्तर देंहटाएं

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मार्मिक अपील-सिर्फ एक फ़ोन की !

मैं इतना बड़ा पत्रकार तो नहीं हूँ मगर 15 साल की पत्रकारिता में मेरी ईमानदारी ही मेरी पूंजी है.आज ईमानदारी की सजा भी भुगत रहा हूँ.पैसों के पीछे भागती दुनिया में अब तक कलम का कोई सच्चा सिपाही नहीं मिला है.अगर संभव हो तो मेरा केस ईमानदारी से इंसानियत के नाते पढ़कर मेरी कोई मदद करें.पत्रकारों, वकीलों,पुलिस अधिकारीयों और जजों के रूखे व्यवहार से बहुत निराश हूँ.मेरे पास चाँदी के सिक्के नहीं है.मैंने कभी मात्र कागज के चंद टुकड़ों के लिए अपना ईमान व ज़मीर का सौदा नहीं किया.पत्रकारिता का एक अच्छा उद्देश्य था.15 साल की पत्रकारिता में ईमानदारी पर कभी कोई अंगुली नहीं उठी.लेकिन जब कोई अंगुली उठी तो दूषित मानसिकता वाली पत्नी ने उठाई.हमारे देश में महिलाओं के हितों बनाये कानून के दुरपयोग ने मुझे बिलकुल तोड़ दिया है.अब चारों से निराश हो चूका हूँ.आत्महत्या के सिवाए कोई चारा नजर नहीं आता है.प्लीज अगर कोई मदद कर सकते है तो जरुर करने की कोशिश करें...........आपका अहसानमंद रहूँगा. फाँसी का फंदा तैयार है, बस मौत का समय नहीं आया है. तलाश है कलम के सच्चे सिपाहियों की और ईमानदार सरकारी अधिकारीयों (जिनमें इंसानियत बची हो) की. विचार कीजियेगा:मृत पत्रकार पर तो कोई भी लेखनी चला सकता है.उसकी याद में या इंसाफ की पुकार के लिए कैंडल मार्च निकाल सकता है.घड़ियाली आंसू कोई भी बहा सकता है.क्या हमने कभी किसी जीवित पत्रकार की मदद की है,जब वो बगैर कसूर किये ही मुसीबत में हों?क्या तब भी हम पैसे लेकर ही अपने समाचार पत्र में खबर प्रकाशित करेंगे?अगर आपने अपना ज़मीर व ईमान नहीं बेचा हो, कलम को कोठे की वेश्या नहीं बनाया हो,कलम के उद्देश्य से वाफिक है और कलम से एक जान बचाने का पुण्य करना हो.तब आप इंसानियत के नाते बिंदापुर थानाध्यक्ष-ऋषिदेव(अब कार्यभार अतिरिक्त थानाध्यक्ष प्यारेलाल:09650254531) व सबइंस्पेक्टर-जितेद्र:9868921169 से मेरी शिकायत का डायरी नं.LC-2399/SHO-BP/दिनांक14-09-2010 और LC-2400/SHO-BP/दिनांक14-09-2010 आदि का जिक्र करते हुए केस की प्रगति की जानकारी हेतु एक फ़ोन जरुर कर दें.किसी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी हेतु मुझे ईमेल या फ़ोन करें.धन्यबाद! आपका अपना रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

क्या आप कॉमनवेल्थ खेलों की वजह से अपने कर्त्यवों को पूरा नहीं करेंगे? कॉमनवेल्थ खेलों की वजह से अधिकारियों को स्टेडियम जाना पड़ता है और थाने में सी.डी सुनने की सुविधा नहीं हैं तो क्या FIR दर्ज नहीं होगी? एक शिकायत पर जांच करने में कितना समय लगता है/लगेगा? चौबीस दिन होने के बाद भी जांच नहीं हुई तो कितने दिन बाद जांच होगी?



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