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गुरुवार, अप्रैल 14, 2011

अपना ब्लॉग क्यों और कैसे बनाये-12

*लेखक की कलम से दो शब्द-2*
एक के बाद एक समाचार जल्दी से देने में अग्रणी ब्लॉगर अख्तर  खान "अकेला", कोटा(राजस्थान)से



आप सभी दोस्त व पाठक अपना "ब्लॉग क्यों और कैसे बनाये" विषय पर पिछली 11 पोस्टों को पढ़कर काफी कुछ जान चुके होंगे.उपरोक्त विषय पर ज्यादा से ज्यादा जानकारी देने का प्रयास किया है.मुझे यह तो पता नहीं है, आपको कितनी जानकारी हासिल हुई है. इसके बारे में आप टिप्पणियाँ करके ही बता सकते हैं. आपकी मुहब्बत में कितनी ताकत है.यह आपके द्वारा टिप्पणी करने के लिए निकले समय से पता चलेगा और टिप्पणी करते भी हैं या इससे एक समय की बर्बादी समझते हैं.टिप्पणियों की उम्मीद उनसे जो टिप्पणी करने के लिए अपनी अँगुलियों को कष्ट देता हो. आज की पोस्ट भी उसी विषय को समर्पित है.हो सकता है कुछ प्रश्न का उत्तर जानकारी के अभाव में छुट गए हो. इसलिए आज की पोस्ट को उपरोक्त विषय की जानकारी पूरी करने के उद्देश्य से प्रेमरस ब्लॉग/वेबसाइट पर जो जानकारी दी गई थी. उसी को बिना किसी प्रकार के संपादन किये हुए ही प्रकाशित किया जा रहा है. उपरोक्त पोस्ट को शाहनवाज़ सिद्दीकी ने लिखा है और  शाहनवाज़ सिद्दीकी ग़ालिब की नगरी दिल्ली से है. एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में कार्यरत है और विज्ञापन एवं डिजाईन से जुड़े कार्य संभालते हैं. इसके अलावा हमारीवाणी के संपादकीय मंडल  से  भी  जुड़े हुए है. इन्होने पत्रकारिता से करिअर की शुरुआत की थी. शुरू से ही लिखने का बहुत शौक था.जोकि इनको अपने स्वर्गीय नानाजी से विरासत में मिला था.मगर अब आर्ट के क्षेत्र में आने के बाद अधिक समय ही नहीं मिल पाता है.कभी-कभार कुछ पत्रिकाओं के लिए भी लिखा, लेकिन लिखने का सिलसिला छूटा नहीं। अब कुछ अधिक समय मिला खुदा की गनीमत समझते हुए अपने ब्लॉग पर लिखना शुरू किया है। इनका यह मानना है कि-विचारों में चाहे विरोधाभास हो, आस्था में चाहे विभिन्नताएं हो. परन्तु मनुष्य को ऐसी वाणी बोलनी चाहिए कि-बात का महत्त्व का पता चल सके. अहम् को छोड़ कर मधुरता से सुवचन बोलें जाएँ तब जीवन का सच्चा सुख मिलता है। इनका कहना है कि-मैं एक साधारण सा मनुष्य हूँ  और मनुष्य का स्वाभाव ही ईश्वर ने ऐसा बनाया है कि गलतियाँ हो जाती हैं। इसलिए गलती मुझसे हो सकती है और अपनी गलती पर मैं हमेशा माफ़ी मांगता हूँ। अगर कहीं कुछ गलती हो गई हो तो क्षमा का प्रार्थी हूँ।
कैसे बनाएं अपना ब्लॉग? 
आज के इस दौर में अपनी बात को दूसरों तक पहुँचाने का सबसे आसान माध्यम ब्लॉग है, जिसे हिंदी में "चिटठा" भी कहा जाता है. ब्लॉग बनाना बहुत आसान है, इसके लिए प्रोग्रामिंग भाषा (Programing Language) की जानकारी होना आवश्यक नहीं है, बल्कि बहुत थोड़ी सी तकनीकी जानकारी ही काफी होती है, अगर तकनीकी जानकारी भी नहीं नहीं तब भी काम चल जाता है. ब्लॉग के लिए कुछ कम्पनियाँ मुफ्त में सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं, जिसमें blogger.com तथा wordpress प्रमुख हैं. इनकी सुविधाएं लेने के लिए आपको ना तो डोमेन नेम खरीदना पड़ेगा और ना ही होस्टिंग पैकेज. बस इनकी साईट पर जाकर अपना अकाउंट बनाना है, अपने ब्लॉग का नाम चुनना है और इसके बाद आप अपनी भावनाओं को ब्लॉग के माध्यम से व्यक्त कर सकते हैं. 

आइये सबसे पहले blogger.com की सेटिंग समझते हैं:-
1. सबसे पहले http://blogger.com पर क्लिक करिए अथवा अपने इन्टरनेट ब्राउज़र के एड्रेस बार में blogger.com लिख कर एंटर दबाइए.

2. अगर आपका गूगल अकाउंट है तो (ऊपर दर्शाए गए चित्रानुसार) यहाँ अपने गूगल अकाउंट से लोगिन करना है अथवा "Don't have a Google Account? के नीचे लिखे "Get started" पर क्लिक करके अपना गूगल अकाउंट बनाना है. अकाउंट बन जाने के बाद फिर यहीं आकर लोगिन करिए.

3. ऊपर दिए गए चित्र अनुसार आपका देश बोर्ड खुल जाएगा. अब आपको चित्र में सर्कल के द्वारा दर्शाए गए लिंक "Create a Blog" पर क्लिक करना है.

4. ऊपर दर्शाए गए चित्र अनुसार खुलने वाले प्रष्ट में "Blog title" के सामने अपने ब्लॉग नाम लिखना है, जैसे की मेरी ब्लॉग साईट का नाम है "प्रेम रस" इसे आप अपने ब्लॉग की भाषा में भी लिख सकते हैं. अर्थात अगर आप हिंदी में अपना ब्लॉग बनाना चाहते हैं तो अपने ब्लॉग का टाइटल हिंदी में लिख सकते हैं. 

5. "Blog address (URL)" के सामने बने बॉक्स में आप को अपने ब्लॉग का पता भरना है, उदहारण: myblog. याद रखिये यहाँ पर आपको पता इंग्लिश के शब्दों में भरना है, जिससे की आपके पाठकों को आप तक पहुँचने में आसानी रहे. 

6. नीचे लिखे "Check Availability" पर क्लिक करके जाँच सकते हैं कि आपके द्वारा भरा गया पता उपलब्ध है अथवा किसी और ने पहले ही यह नाम रख रखा है. 

7. अगर आपका पता उपलब्ध है तो ठीक है अन्यथा दूसरा पता लिख कर फिर से जाँच करिए. पता मिल जाने पर उसके नीचे लिखे "Word Verification" के सामने लिखे अक्षरों को नीचे बने बॉक्स में लिख डालिए. यह शब्द सिक्योरिटी जाँच के लिए होते हैं और इससे सिस्टम को पता चलता है कि फॉर्म भरने वाला कोई मनुष्य है ना कि कंप्यूटर सोफ्टवेयर. अब नीचे लिखे "Continue" पर क्लिक करिए.

8. इसके बाद ऊपर दर्शाए गए चित्रानुसार ब्लॉग की थीम अर्थात उसकी साज-सज्जा के विकल्प दिखाई देने लगेंगे. अब आपको अपनी रूचि अनुसार इसमें से किसी भी विकल्प पर क्लिक करके सबसे नीचे तीर के निशान में लिखे "Continue" पर क्लिक करना है. इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद आपका ब्लॉग बन जाएगा. उदहारण के लिए अगर आपने पता "myblog" रखा तो आपके ब्लॉग का पूरा पता (अर्थात URL) myblog.blogspot.com होगा

9. इस प्रक्रिया के बाद ऊपर दिखाई दे रहा प्रष्ट खुलेगा जिसमें तीर के निशान में लिखे "Start blogging" पर क्लिक करने से आपकी ब्लॉग पोस्ट करने वाला प्रष्ट खुल जाएगा, जो कुछ इस तरह का दिखाई देगा.

10. यहाँ "Title" में आपको अपनी ब्लॉग की पोस्ट का शीर्षक लिखना है तथा नीचे की ओर बने हुए बड़े से बॉक्स में अपनी पोस्ट लिखनी है. इस बॉक्स में ऊपर बने विभिन्न तरह के आइकन्स को आपने अपनी पोस्ट की सजावट के लिए प्रयोग कर सकते हैं. आइकन "अ" पर क्लिक करने से आप हिंदी में लिख सकते हैं, इस पर क्लिक करते ही आप जैसे ही अपने कीबोर्ड से कुछ भी टाइप करेंगे वह अपने आप ही हिंदी में बदल जाएगा, जैसे कि "ham" टाइप करने से यह इसे "हम" में बदल देगा.

blogger.com के बारे में अन्य जानकारियाँ में आगे कुछ और पोस्ट में देने की कोशिश करूँगा, अगर आप कुछ जानना चाहें तो नीचे टिपण्णी बॉक्स में लिख कर मालूम कर सकते हैं अथवा मेरे ईमेल पते shnawaz@gmail.com पर लिख कर मालूम कर सकते हैं.

स्वयं की ब्लॉग साईट: आप अपना स्वयं का ब्लॉग भी बना सकते हैं, जिसके लिए आपको एक डोमेन नेम अर्थात अपने ब्लॉग का नाम खरीदना पड़ेगा, जैसे मेरे ब्लॉग का नाम www.premras.com है, और साथ ही अगर आप अपनी ब्लॉग-पोस्ट को अपने स्पेस में रखना चाहें तो होस्टिंग पैकेज भी खरीद सकते. होस्टिंग के अंतर्गत उपलब्ध जगह (स्पेस) और डाटाबेस के द्वारा ही ब्लॉग-पोस्ट को सेव किया जाता है. किसी अच्छी कंपनी से डोमेन नेम खरीदने का तकरीबन 600 रूपये का खर्च आता है. अगर आप केवल डोमेन नेम ही खरीदना चाहते हैं तो अपनी ब्लॉग पोस्ट blogger.com के द्वारा ही प्रकाशित कर सकते हैं. इसके लिए आपको डोमेन नेम खरीदने के बाद उसकी सेटिंग में कुछ बदलाव करने पड़ेंगे तथा blogger.com की सेटिंग में भी कुछ बदलाव करने पड़ेंगे, जिन्हें मैं अगली पोस्ट में समझाने की कोशिश करूँगा.
अगर आप डोमेन के साथ ही होस्टिंग पैकेज भी खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए आपको 100 से 150 MB डिस्क स्पेस के लिए तकरीबन 1500 रूपये खर्च करने पड़ेंगे. इसके उपरान्त आप अपनी ब्लॉग साईट का कंटेंट डिज़ाइन करवा सकते हैं अथवा wordpress का सेटअप भी प्रयोग कर सकते हैं. wordpress सेटअप मुफ्त में उपलब्ध होता है, लेकिन इसको सर्वर पर अपलोड करने के साथ ही कुछ सेटिंग भी करनी पड़ती हैं. इसके साथ ही इन्टरनेट पर हज़ारों मुफ्त थीम (साज-सज्जा) भी उपलब्ध हैं तथा आप प्रोफेशनल थीम खरीद भी सकते हैं अथवा अपनी इच्छा अनुसार डेवलेप भी करा सकते हैं, जिसका खर्च कार्य के अनुसार ही आएगा. 

आप चाहें तो अपना डोमेन अथवा होस्टिंग पैकेज वेब डेवलेपमेंट कंपनी "ह्यूमर-शॉपी" http://www.humourshoppe.com से भी खरीद सकते हैं. यहाँ से डोमेन आपको blogger सेटिंग के साथ मिलेगा तथा होस्टिंग पैकेज खरीदने पर मुफ्त में wordpress सेटअप भी मिल जाएगा. आप चाहें तो मुफ्त थीम अपलोड कर सकते हैं अथवा अपनी थीम अपने हिसाब से बनवा सकते हैं या फिर बाज़ार में मौजूद प्रोफेशनल थीम खरीद भी सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए आप humourshoppe@gmail.com पर ईमेल कर सकते हैं.

Ramesh Kumar Sirfiraa ne कहा: आपने अच्छी श्रृंखला की शुरुआत की है, लगता है इसमें आगे की कुछ जानकारी शायद मेरे भी काम आ सकेगी. आपकी यह पोस्ट जनोपयोगी है और बहुत लोगों के काम आयेगी. नवोदितों के लिए तो काफी महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी वाली सामग्री दी है. जितनी भी तकनीकी जानकारी हिन्दी में आये उतना ही अच्छा है. आपने काफी सरल तरीके से बातों को समझाया है. आपने ब्लागिंग इच्छुक लोगो के लिए एक अच्छी पोस्ट दी है, जिसे ब्लागजगत में हमेशा याद रखा जायेगा. आपको बेहतरीन पोस्ट लेखन के लिए बधाई ! आशा है कि अपने सार्थक लेखन से, आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे. मुझे उपरोक्त लेख की नवीनतम श्रृंखलों का इन्तजार रहेगा. आशा है अतिशीघ्र प्रकाशित होगी. आपने बहुत अच्छी तकनीकी जानकारी दी है और साथ में मन में उठने वाले प्रश्नों का उत्तर देकर लेख की सार्थकता साबित करने की भरपूर प्रयास किया है. इसके अलावा हिंदी का ब्लॉग बनाने के इच्छुक व्यक्तियों के लिए उदाहरण(फोटो सहित) देने से लेख बहुत उपयोगी बन गया है. हिन्दी में काम करनेवालों के लिहाज से ब्लागर(http://blogger.com/) और वर्डप्रेस (http://wordpress.com/) ही श्रेष्ठ विकल्प हैं. एक और स्थान है जहां आप अपना हिन्दी ब्लाग बना सकते हैं वह है लाईव जर्नल (http://livejournal.com/) . यही मुख्य तीन स्थान हैं.

अपना "ब्लॉग क्यों और कैसे बनाये" विषय पर जितनी भी मुझे जानकारी थीं या यह कहूँ एकत्रित की थीं. वो सब बाँट दी है. अब मेरा और आपका कितना ज्ञान बढ़ता है. यह सब भविष्य की गर्त में है.आपका अपना -रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" 
 

6 टिप्‍पणियां:

  1. रमेश जी
    उपयोगी जानकारी के लिए आभार आपका...

    उत्तर देंहटाएं
  2. रमेश कुमार "सिरफिरा" जी,
    बहुत ही उपयोगी जानकारी. शाहनवाज़ सिद्दीकी जी के साथ आपको भी धन्यवाद....

    उत्तर देंहटाएं
  3. -------- यदि आप भारत माँ के सच्चे सपूत है. धर्म का पालन करने वाले हिन्दू हैं तो
    आईये " हल्ला बोल" के समर्थक बनकर धर्म और देश की आवाज़ बुलंद कीजिये...
    अपने लेख को हिन्दुओ की आवाज़ बनायें.
    इस ब्लॉग के लेखक बनने के लिए. हमें इ-मेल करें.
    हमारा पता है.... hindukiawaz@gmail.com
    समय मिले तो इस पोस्ट को देखकर अपने विचार अवश्य दे
    देशभक्त हिन्दू ब्लोगरो का पहला साझा मंच
    क्या यही सिखाता है इस्लाम...? क्या यही है इस्लाम धर्म

    उत्तर देंहटाएं
  4. -------- यदि आप भारत माँ के सच्चे सपूत है. धर्म का पालन करने वाले हिन्दू हैं तो
    आईये " हल्ला बोल" के समर्थक बनकर धर्म और देश की आवाज़ बुलंद कीजिये...
    अपने लेख को हिन्दुओ की आवाज़ बनायें.
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    हमारा पता है.... hindukiawaz@gmail.com
    समय मिले तो इस पोस्ट को देखकर अपने विचार अवश्य दे
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    क्या यही सिखाता है इस्लाम...? क्या यही है इस्लाम धर्म

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मार्मिक अपील-सिर्फ एक फ़ोन की !

मैं इतना बड़ा पत्रकार तो नहीं हूँ मगर 15 साल की पत्रकारिता में मेरी ईमानदारी ही मेरी पूंजी है.आज ईमानदारी की सजा भी भुगत रहा हूँ.पैसों के पीछे भागती दुनिया में अब तक कलम का कोई सच्चा सिपाही नहीं मिला है.अगर संभव हो तो मेरा केस ईमानदारी से इंसानियत के नाते पढ़कर मेरी कोई मदद करें.पत्रकारों, वकीलों,पुलिस अधिकारीयों और जजों के रूखे व्यवहार से बहुत निराश हूँ.मेरे पास चाँदी के सिक्के नहीं है.मैंने कभी मात्र कागज के चंद टुकड़ों के लिए अपना ईमान व ज़मीर का सौदा नहीं किया.पत्रकारिता का एक अच्छा उद्देश्य था.15 साल की पत्रकारिता में ईमानदारी पर कभी कोई अंगुली नहीं उठी.लेकिन जब कोई अंगुली उठी तो दूषित मानसिकता वाली पत्नी ने उठाई.हमारे देश में महिलाओं के हितों बनाये कानून के दुरपयोग ने मुझे बिलकुल तोड़ दिया है.अब चारों से निराश हो चूका हूँ.आत्महत्या के सिवाए कोई चारा नजर नहीं आता है.प्लीज अगर कोई मदद कर सकते है तो जरुर करने की कोशिश करें...........आपका अहसानमंद रहूँगा. फाँसी का फंदा तैयार है, बस मौत का समय नहीं आया है. तलाश है कलम के सच्चे सिपाहियों की और ईमानदार सरकारी अधिकारीयों (जिनमें इंसानियत बची हो) की. विचार कीजियेगा:मृत पत्रकार पर तो कोई भी लेखनी चला सकता है.उसकी याद में या इंसाफ की पुकार के लिए कैंडल मार्च निकाल सकता है.घड़ियाली आंसू कोई भी बहा सकता है.क्या हमने कभी किसी जीवित पत्रकार की मदद की है,जब वो बगैर कसूर किये ही मुसीबत में हों?क्या तब भी हम पैसे लेकर ही अपने समाचार पत्र में खबर प्रकाशित करेंगे?अगर आपने अपना ज़मीर व ईमान नहीं बेचा हो, कलम को कोठे की वेश्या नहीं बनाया हो,कलम के उद्देश्य से वाफिक है और कलम से एक जान बचाने का पुण्य करना हो.तब आप इंसानियत के नाते बिंदापुर थानाध्यक्ष-ऋषिदेव(अब कार्यभार अतिरिक्त थानाध्यक्ष प्यारेलाल:09650254531) व सबइंस्पेक्टर-जितेद्र:9868921169 से मेरी शिकायत का डायरी नं.LC-2399/SHO-BP/दिनांक14-09-2010 और LC-2400/SHO-BP/दिनांक14-09-2010 आदि का जिक्र करते हुए केस की प्रगति की जानकारी हेतु एक फ़ोन जरुर कर दें.किसी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी हेतु मुझे ईमेल या फ़ोन करें.धन्यबाद! आपका अपना रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

क्या आप कॉमनवेल्थ खेलों की वजह से अपने कर्त्यवों को पूरा नहीं करेंगे? कॉमनवेल्थ खेलों की वजह से अधिकारियों को स्टेडियम जाना पड़ता है और थाने में सी.डी सुनने की सुविधा नहीं हैं तो क्या FIR दर्ज नहीं होगी? एक शिकायत पर जांच करने में कितना समय लगता है/लगेगा? चौबीस दिन होने के बाद भी जांच नहीं हुई तो कितने दिन बाद जांच होगी?



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