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मंगलवार, मई 03, 2011

आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें

म ब्लोगिंग जगत के "अजन्मे बच्चे"( अभी तो अजन्मा बच्चा हूँ मेरे दोस्तों !) हैं और ब्लोगिंग जगत का अनपढ़, ग्वार यह नाचीज़ इंसान का अभी जन्म ही नहीं हुआ है. अभी हम ब्लोगिंग जगत का क.ख.ग सिखने की कोशिश कर रहा हूँ. इसलिए मेरे लिए खासतौर पर देवनागरी की मूल हिंदी लिपि को रोमन लिपि में या अंग्रेजी में लिखी गयी टिप्‍पणी पढना मुश्किल कार्य है, इसलिए जिस पोस्‍ट में भी देवनागरी की मूल हिंदी लिपि को रोमन लिपि में या अंग्रेजी  में टिप्‍पणी होती हैं. मैं उसको पढता ही नहीं. हाँ, कभी-२ मेरी पोस्‍ट पर होती है.उसे कैसे न कैसे करके पढता हूँ.जब कभी-२ समय होता है तब उसका देवनागरी की मूल हिंदी लिपि में अनुवाद भी कर देता हूँ.  इसको दूसरों को भी पढ़ने में कठिनाई होती है.
                   इस बात को सभी ब्लोग्गरों को भी समझना चाहिए। जब आपके विचारों और भावनाओं को कोई समझ ही नहीं पाता है. तब अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने का क्या फायदा. मुझे बार-बार गूगल transliteration पर जाकर देवनागरी की मूल हिंदी लिपि को टाईप करना पड़ता है. फिर कापी पेस्ट करता हूँ. मुझे इसी सुविधा की आदत है. बहुत से ब्लॉग पर "हिंदी वर्जन का विजेट " लगा हुआ होता है लेकिन हर ब्लॉग पर ज्यादात्तर नही होता. तब कापी पेस्ट करने में टाईम बहुत लगता है. मगर मै ज्यादात्तर देवनागरी की मूल हिंदी लिपि में ही टिप्पणी करता हूँ.कभी-कभी समय न होने की वजय से ही ज्यादा से ज्यादा 11शब्दों की टिप्पणी रोमन लिपि में करता हूँ. अगर कोई  ओर तरीका हो तो मुझे अवश्य बताए, क्योंकि ऐसा तब ही संभव हो पाता है. जब इन्टरनेट पर नेटवर्क सही से आ रहा हो.
           मै खुद को देवनागरी की मूल हिंदी लिपि में ही सहज(अपने विचारों और भावनाओं को व्यक्त करने में) समझता हूँ. मै चाहता हूँ कि-सब ब्लॉगर अपने-अपने ब्लोगों पर 'हिंदी वाला विजेट' अपने ब्लॉग पर लगाए और तकनीकी ज्ञाता मुझे मेरे ब्लोगों पर लगाने में मदद करें. मुझे देवनागरी की मूल हिंदी लिपि को रोमन लिपि में या अंग्रेजी में लिखी टिप्पणी पढने में असुविधा होती है.बहुत ज़रूरी ना हो तो मैं भी पढने से टालने की कोशिश करता हूँ. मेरे कंप्यूटर का कीबोर्ड अंग्रेजी में है, किन्तु देवनागरी की मूल हिंदी लिपि को साफ्टवेयर(गूगल transliteration) में टाईप करके टिप्पणीयां पेस्ट करता हूँ. मै हर संभव कोशिश करता हूँ कि-टिप्पणी देवनागरी की मूल हिंदी लिपि में हो, जब मुझे खुद दूसरो द्वारा देवनागरी की मूल हिंदी लिपि को रोमन लिपि में या अंग्रेजी में की गयी टिप्पणिया पढने में परेशानी होती है. फिर दूसरों को कितनी दिक्कत होती होगी?  मुझे दूसरो द्वारा देवनागरी की मूल हिंदी लिपि को रोमन लिपि में या अंग्रेजी में की गयी टिप्पणिया सुहाती ही नहीं है. यह मेरे दिल के यही ज्जबात है बल्कि किसी का कोई अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं है. क्या हम अंग्रेजी का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करके अपने को ज्यादा पढ़ा-लिखा होने का दिखावा नहीं करते हैं? किसलिए और किसके लिए इतना दिखावा? 
              मुझे कभी-कभी देवनागरी की मूल हिंदी लिपि को रोमन लिपि में या अंग्रेजी में टिप्पणिया व्यावहारिक(कुछ व्यक्ति हिंदी लिपि में विचारों और भावनाओं को समझने में असमर्थ होते हैं) समस्यायों के चलते करनी पड़ती है.जैसे-मोबाईल पर संदेश आदि. वैसे ज्यादात्तर मोबाईल पर संदेश हिंदी लिपि की रोमन लिपि में ही भेजता हूँ. मुझे हिन्दी लिपि के ब्लॉग पर हिन्दी लिपि में ही टिप्पणी अच्छी लगती है और हिंदी लिपि को ही पढने में आनंद आता है. हमारी कथनी और करनी में स्वार्थी राजनीतिकों जैसा फर्क नहीं होना चाहिए.
           आज मेरे प्रकाशन परिवार में सबसे ज्यादा हिंदी लिपि की पत्र-पत्रिकाएँ, लेटर पैड, बिलबुक, प्रचार सामग्री, विजिटिंग कार्ड, मेरे समाचार पत्रों को रजिस्टर्ड करने की कार्यवाही के फॉर्म, शपथ पत्र, समाचार पत्रों के पंजीकरण प्रमाण पत्र आदि, विज्ञापन रेट कार्ड व बुकिंग फॉर्म, रबड़ की मोहरें, समाचारों पत्रों में हिंदी लिपि के विज्ञापन के रेट कम है और अंग्रेजी के ज्यादा है और सबसे ज्यादा हिंदी लिपि में विज्ञापन प्रकाशित हुए है. अपने क्षेत्र से दो बार चुनाव लड़ने की प्रक्रिया के फॉर्म, शपथ पत्र आदि सब हिंदी लिपि में भर कर दे चूका हूँ.  इसके साथ ही अनेकों ऐसी सामग्री भी हिंदी लिपि में है. जो किसी तक अपने विचार और भावना समझाने में सहायक होती है. 

       इन्टरनेट की दुनिया में जनवरी 2010 में प्रवेश करने के मात्र सात-आठ महीने की मेहनत से ही अपनी ईमेल, ब्लॉग, ऑरकुट और फेसबुक की प्रोफाइल आदि की सभी सैटिंग हिंदी लिपि में  ही कर रखी है.ऑरकुट और फेसबुक पर "रमेश कुमार सिरफिरा(Ramesh Kumar Sirfiraa" के नाम से मौजूद हूँ. आज तक लगभग 992 लोगों को ईमेल हिंदी लिपि में भेज चुका हूँ और  अनेकों ब्लोगों पर लगभग 1100  टिप्पणी हिंदी लिपि में कर चुका हूँ. अपने ब्लोगों पर लगभग 20000 शब्दों को हिंदी लिपि में लिख चुका हूँ. अपने  उपरोक्त ब्लॉग  पर  अन्य  व्यक्तियों  को  हिंदी लिपि सिखाने के उद्देश्य से दो पोस्ट हिंदी की टाइपिंग कैसे करें  और  हिंदी में ईमेल कैसे भेजें. पोस्ट  भी  लिखी  थीं. 
         अपनी पत्नी के डाले फर्जी केसों से संबंधित लगभग 20000 शब्द हिंदी लिपि में लिखकर न्याय व्यवस्था के अधिकारियों को लिखकर दे चुका हूँ और आने वाले दो महीनों में लगभग 20000 शब्द हिंदी लिपि में लिखकर देने वाला हूँ. इसके अलावा जब से मेरे ऊपर फर्जी केस दर्ज हुए तब से पत्नी को समझने के उद्देश्य से लगभग 20000 शब्द हिंदी लिपि में बोल चुका हूँ.
           प्रेम विवाह होने से पहले अपनी पत्नी को लगभग 2000 शब्द
हिंदी लिपि लिखकर दे चुका था और लगभग 20000 शब्दों का उच्चारण हिंदी लिपि में कर चुका हूँ.  इसके साथ ही मेरे ऊपर फर्जी केस दर्ज  होने के बाद से हिंदी लिपि के लगभग 200000  क़ानूनी शब्दों को ब्लॉग पर और लगभग 200000 क़ानूनी शब्द अखवार और मैगजींस में पढ़ चुका हूँ.इसके साथ ही हिंदी लिपि के टी.वी चैनलों पर धारा 498A और 406 की चर्चाओं(बहस आदि) में लगभग 200000शब्द और अपने दोस्तों/रिश्तेदारों से उलाने(ताने) के रूप में लगभग 20000 शब्द अपने कानों से सुन चुका हूँ. 
        इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण बात अपने मात्र साढ़े तीन साल के वैवाहिक जीवन में अपनी पत्नी और सुसराल वालों से लगभग 200000अपशब्द हिंदी लिपि के और 200 अंग्रेजी में सुन चुका हूँ.अब तक लगभग दो करोड़ शब्द हिंदी लिपि के अपनी पत्रकारिता(समाचार पत्र-पत्रिकाओं में) के चलते लिख चुका हूँ और प्रकाशित हो चुके हैं. लगभग दो लाख शब्द हिंदी लिपि के कुव्यवस्था  के चलते शिकायती पत्रों में लिख चुका हूँ और अन्य व्यक्तियों की मदद करने के उद्देश्य से लगभग दो लाख शब्द हिंदी लिपि के उनके शिकायती पत्र और किसी कार्य से जुड़े फोरमों में लिख चुका हूँ. अर्थात पढ़ता हिंदी लिपि हूँ. लिखता हिंदी लिपि हूँ. सुनता हिंदी लिपि हूँ. खाता हिंदी लिपि हूँ, पहनता हिंदी लिपि  हूँ और बोलता भी हिंदी लिपि में हूँ. मुझे इस पर गर्व है कि-मुझे अंग्रेजी नहीं आती है. 
               एक बार आप भी गर्व से कहों हम सच्चे भारतीय है. हिंदी लिपि को लेकर आज मुझ में एक ही कमी है कि 10-11दिन पहले ही एक दोस्त ने मुझे इन्टरनेट पर चैटिंग(वार्तालाप, बातचीत) करनी सिखाई है, वो  मुझे जानकारी न होने की वजह से देवनागरी की मूल हिंदी लिपि को रोमन लिपि में लिखनी पड़ती हैं. जानकारी प्राप्त होते ही हिंदी लिपि  में बातचीत शुरू कर दूंगा. ऐसा मेरा दृढ संकल्प है.  
आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें
आज सभी हिंदी लिपि ब्लॉगर भाई यह शपथ लें कि-हम आज के बाद  हिंदी लिपि और अन्य लिपियों के ब्लोगों को पढने के बाद भी अपनी टिप्पणी हिंदी लिपि में ही करूँगा और हिंदी लिपि ब्लोगिंग जगत को उंचाईयों पर पहुँचाने के लिए हिंदी लिपि के प्रति ईमानदार बना रहूँगा.अपने ब्लॉग का नाम (शीर्षक) हिंदी लिपि में लिखूँगा. जय हिंद!   
नोट : दोस्तों, मैंने अब इनस्क्रिप्ट के माध्यम से  देवनागरी की लिपि द्वारा हिंदी लिखना सीख लिया है.   

45 टिप्‍पणियां:

  1. भाई!
    आप का हिन्दी प्रेम सराहनीय है। लेकिन हिन्दी को रोमन में या किसी भी लिपि में लिखा जा सकता है। आप हिन्दी की मूल लिपि को भी हिन्दी कह रहे हैं। उसे देवनागरी कहा जाता है। मराठी और संस्कृत भाषाएँ भी इसी लिपि में लिखी जाती हैं।
    आप देवनागरी को ट्रांसलिटरेशन के माध्यम से लिखते हैं जो बहुत परेशानी तलब है इस के बजाए आप इसे इनस्क्रिप्ट के माध्यम से लिखें तो आप की गति भी बढ़ेगी और देवनागरी में लिखी गई हिन्दी अधिक शुद्ध होगी। आप इनस्क्रिप्ट कैसे सीख सकते हैं इस के क्या लाभ हैं और कैसे सीख सकते हैं इस के लिए आप अनवरत पर साइडबार में इन्स्क्रिप्ट लेबल को क्लिक कर के देखें। वहाँ आप को पर्याप्त सामग्री मिल जाएगी। कोई परेशानी हो तो मुझे संपर्क कर सकते हैं। इस से आप को ट्रांसलिटरेशन का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। आप सीधे हिन्दी लिख सकेंगे। टिप्पणियों में ही नहीं सभी जगह।

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  2. दिनेश जी की बात गौरतलब है..इसे ही मेरी भी मानें.

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  3. बहुत अच्छा सन्देश दिया है आपने इसीलिए तो मैंने भी अपना ब्लॉग हिन्दी में बना रखा है !
    गर्व से कहो हम हिन्दोस्तानी है और हिन्दी हमारी मात्रि भाषा है,
    क्यूंकि दुनिया में कोइ भाषा ऐसी नहीं है जिसमे संस्कार हों सभ्य हो और अपने आप में पूर्ण हो, मेरी हिन्दी भाषा के अलावा,
    इसीलिए मुझे इस पर नाज है !

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  4. आपका हिंदी प्रेम सराहनीय है हम भी कोशिश करेंगे , मगर भाई जैन साहेब आपकी एंट्री दूसरे ब्लागों पर बड़ी जोरदार तरह से होती है मेरा दिल बहुत कमजोर कृपया आहिस्ता से आयें आने के लिए धन्यवाद

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  5. वाह इतना हिसाब किताब? आप केफेहिन्दी आदि टाईपिन्ग टूल सिस्टम मे इन्स्टाल कर लें उस से आन लाईण या आफ लाईन यूनिकोड मे लिख सकते हैं चैट भी हिन्दी मे कर सकते हैं। इसके लिये यहाँ जायें।
    www.cafehindi.com shubhakaamanaayeM|

    vaise hindee bl

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  6. मेरी यह पोस्ट उन तमाम लोगो के लिए है जिनको बात बात में कब्ज की शिकायत हो जाती है (डाक्टरों का मानना है की कब्ज तनाव की वजह से भी होता है ) अब ब्लाहिंग करना और तनाव का होना एक दुसरे से सम्बंधित है. पोस्ट डाल दी लेकिन एकु कमेंटवा नाही दिख रहा. नतीजा तनाव. लोग मेरी पोस्ट को पढ़ नही रहे. नतीजा तनाव. रात में दो बजे उठकर देखा की सूर्यभान ने पोस्ट लिख दी. तनाव हुई गवा. लोग मेरी इज्जत नही कर रहे सम्मान नही कर रहे बड़ा ब्लॉगर नही मान रहे. फिर तनाव अब क्या होगा? होगा क्या कब्ज हो जाएगा और क्या? तो साहिबान ऐसे लोगो के लिए एक शफाखाना खुल गया है. इस शफेखाने में जाने के बाद आपकी कब्जियत दूर की जायेगी. गारटेड इलाज. चैलेन्ज . गलत साबित करने वाले को एक लाख रूपये का नकद ईनाम. इस पोस्ट की कटिंग लाने वाले को ९०० रूपये की छूट दी जायेगी. लेकिन सावधान नक्कालों से इस नाम से मिलते जुलते लोगो के यहाँ जाकर मरीजों ने शिकायत की है. डॉ जानवर शौचाल खानदानी एक मात्र असली सबसे बड़े वाले डाक्टर साहब है हालांकि शौचक्रिया होनोलूलू रिटर्न . तो आज ही अपनी बुकिंग कराइए.

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  7. http://antarsohil.blogspot.com/2010/11/hindi-kaise-likhe-hindi-writing-hindi.html

    उपरोक्त लिंक पर पोस्ट पढ लें। हिन्दी लिखने के लिये एक बहुत बढिया टूल के बारे में है। आप आसानी और तेजगति से हिन्दी में ऑनलाइन और ऑफलाइन लिख पायेंगें।

    प्रणाम

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  8. पोस्ट पढने के बाद हिन्दी राईटर के बारे में कोई समस्या आये तो मुझे 9871287912 पर फोन कर लें।

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  9. बहुत सरल है भाई हिंदी में लिखना बस गूगल में जाकर google hindi translation टाइप कीजिये और ट्रांसलेटर मौजूद.. रोमन में लिखो कोई परेशानी नहीं .... आपका हिंदी प्रेम बढ़िया लगा ..लगे रहो ..मंजिल एक दिन मिल ही जायेगी ......ब्लॉग्गिंग के भविष्य उज्जवल दिखता है ....

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  10. आपका सरफिरा वाला अंदाज बहुत भाया

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  11. जिस शिष्य(रमेश) के पास श्री दिनेशराय द्विवेदी जी जैसे गुरुवर हो उसको अपने आलेख में क्या सुधार करना या क्या गलती हो गई है पर सोचने और देखने की जरूरत नहीं होती हैं. मेरे गुरुवर जी की महिमा इतनी न्यारी हैं कि-रात 12 बजे शिष्य ने अपने ब्लॉग पर पोस्ट प्रकाशित की और 12 :26 पर उनकी टिप्पणी भी आ गई. आपसे उपरोक्त पोस्ट में यहाँ-यहाँ पर गलती हुई है. जो अपने शिष्य पर रात-दिन नज़र रखे. आज के युग में किसी शिष्य का कहाँ होगा ऐसा भाग्य! क्या मैंने कोई गलत कहा है दोस्तों?

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  12. @गुरुवर श्री दिनेशराय द्विवेदी जी आपके कथन अनुसार अपनी गलती का सुधार कर दिया है और आप इसी प्रकार मुझ पर कृपा दृष्टि बनाये रखे.

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  13. .@ आप सभी टिप्पणिकर्त्ताओं के दिए विचारणीय सुझाव पर अमल जरुर करूँगा व लिंकों को पढ़कर कोई समस्या होगी.तब फ़ोन व ईमेल भी जरुर करूँगा. कुछ समस्यों के चलते कुछ दिन अब इन्टरनेट पर ज्यादा समय नहीं दें पाऊंगा. आप अपना प्यार और दुलार इसी प्रकार बनाये रखे. आपके द्वारा की टिप्पणियाँ मेरे लिए बहुमूल्य और उसी समान है.जैसे-किसी भूखे को रोटी मिल गई हो. अब तक की टिप्पणिकर्त्ताओं को और आज के बाद करने वालों का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ.

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  14. क्या बात है आप हिंदी को लेकर इतने फिक्रमंद हैं. आप नाम ही नहीं काम के भी सिरफिरे हैं.

    उत्तर देंहटाएं
  15. रमेश जी आप की बातो से सहमत हूँ मै भी चाहती हूँ की सभी हमेसा हिंदी में लिखे पर कई बार मै भी आलस में एक दो शब्द वाली टिप्पणिया रोमन में लिख देती हूँ आगे से ऐसा करने से बचूंगी |

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  16. रमेश जी आप की बातो से सहमत हूँ मै भी चाहती हूँ की सभी हमेसा हिंदी में लिखे पर कई बार मै भी आलस में एक दो शब्द वाली टिप्पणिया रोमन में लिख देती हूँ आगे से ऐसा करने से बचूंगी |

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  17. आपका प्रयास स्तुत्य है!
    मैं तो देवनागरी लिपि में ही अपने सारे काम करता हूँ33

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  18. बहुत अच्छा सन्देश दिया है आपने अगर आप अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट लगाना चाहते हो तो यहाँ क्लीक करे

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  19. बिलकुल सही

    एकाध पंक्ति हो तो रोमन में लिखा मैं भी पढ़ लेता हूँ
    किन्तु
    कुछ अधिक ही लिखा गया हो तो उसे छोड़ना ही पड़ता है
    लेकिन
    आदतन देवनागरी में लिखने वाले का रोमन लिखा जाना किसी मज़बूरी का संकेत करता है
    फिर वह लेख कितना भी बड़ा हो मैं उसे स्क्रिप्ट कनवर्टर में डाल कर एक सेकेण्ड के भीतर ही देवनागरी में बदल कर पढ़ने की जुगत भिड़ा ही लेता हूँ
    आप भी कोशिश कीजिए इस लिंक पर

    हिंदी राईटर व्यक्तिगत तौर पर मुझे भी बेहद भाता है

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  20. बहुत अच्छा सन्देश दिया है आप का हिन्दी प्रेम सराहनीय है।

    उत्तर देंहटाएं
  21. क्या बात है आप हिंदी को लेकर इतने फिक्रमंद हैं. आप नाम ही नहीं काम के भी सिरफिरे हैं!!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  22. सही कहा आपने. दरअसल वही लोग रोमन में कमेन्ट करते हैं. जो ब्लोगिंग में नए हैं, या उन्हें पूरी जानकारी नहीं है. आपका मुद्दा अच्छा है. हमें देवनागरी में कमेन्ट करने चाहिए.

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  23. रमेशजी, आपके हिंदी प्रेम को देख कर मन प्रसन्न हुआ, अच्छी... बहुत अच्छी बात है यदि आप और हम सब हिंदी के प्रचार के लिए काम करें| परन्तु आपका निम्नलिखित कथन
    एक बार आप भी कहों हम सच्चे भारतीय है और अगर नहीं है तो आज से बनने की कोशिश करेंगे.
    पढ़ कर मन आहात हुआ, हम सब हिंदी प्रेमी, मात्रभाषा प्रेमी और राष्ट्र प्रेमी हैं... तभी तो अपनी कार्य भाषा न होने के बावजूद, अपने-अपने व्यस्त जीवन से कुछ पल चुरा के हिंदी को समर्पित करते हैं| भारतीय होने का प्रमाण पत्र हिंदी लेखन नहीं है, और आप कैसे किसी दूसरे व्यक्ति से कह सकते हैं की वह सच्चे भारतीय नहीं हैं?
    भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है, इसे सामाजिक उथल-पुथल का माध्यम मत बनाईये!!!
    आज सभी हिंदी लिपि ब्लॉगर भाई यह शपथ लें कि-हम आज के बाद कम से कम हिंदी लिपि के ब्लोगों को पढने के बाद अपनी टिप्पणी हिंदी लिपि में ही करूँगा और हिंदी लिपि ब्लोगिंग जगत को उंचाईयों पर पहुँचाने के लिए हिंदी लिपि के प्रति ईमानदार बना रहूँगा.अपने ब्लॉग का नाम (शीर्षक) हिंदी लिपि में लिखूँगा.
    जिस भाषा में पोस्ट लिखी जाये उसी भाषा में टिपण्णी देना, सभ्यता है; उसे अनिवार्य क्यूं बना रहे हैं? अगर मुझे जापानी नहीं आती तो मैं टिपण्णी तो सिर्फ अंग्रेजी या हिंदी मैं ही दूँगी ना? या फिर टिपण्णी दूं ही ना???
    हमसब के हिंदी लेखन में सुधार के लिए काफी ब्लोगेर्स ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं| हिंदी को उसके चरम तक पहुँचाना हमारा ध्यये होना चाहिए, परन्तु हमें राष्ट्रीय एकता और भाई चारे को आहात नहीं करना चाहिए|

    धन्यवाद

    उत्तर देंहटाएं
  24. रमेश भाई, बहुत ही बेहतरीन सन्देश दिया है आपने.... मैं तो हमेशा ही हिंदी में ही टिप्पणी करता हूँ, यह अवश्य है कि जब मोबाइल से पोस्ट पढता हूँ तो रोमन में टिप्पणी करनी पड़ती हैं, परन्तु वह भी हिंदी में ही करता हूँ... मोबाइल से मजबूरी है, क्योंकि मेरे मोबाइल से हिंदी टाइप नहीं होती है.

    उत्तर देंहटाएं
  25. हिन्दी ब्लॉग पर हिन्दी में टिप्पणी ही शोभा देती है |अच्छी पोस्ट |
    मुझे भी हिन्दी में ही काम करना अच्छा लगता है |मेरे ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद |
    आशा

    उत्तर देंहटाएं
  26. भाई मैं तो हिंदी में ही टिप्पणी करती हूं...
    एक गलती आपने बार-बार की है यह टाइपिंग की नहीं है....
    (हिंदी लिपि में भेज चूका हूँ ).....
    यहां चूका कि जगह चुका होगा.....होगा...
    माफी चाहूंगी बुरा लगा हो तो लेकिन सुधार जरूर लीजिएगा...एक-दो जगह गलती तो टाइपिंग में चूक होने की वजह से हो सकती है लेकिन हर जगह नहीं...
    वैसे कहा आपने सही है...

    उत्तर देंहटाएं
  27. @वीना जी,आपने मेरी गलती की तरफ ध्यान दिलाया तब आपको माफ़ी की नहीं इनाम की जरूरत है.मगर फ़िलहाल असमर्थ हूँ.यहां चूका कि जगह चुका का सुधार कर दिया है.आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.

    @कविता प्रसाद जी,आपने मेरी दोनों गलतियों पर तर्कपूर्वक बातें बताकर ध्यान दिलाया.उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. दोनों स्थानों पर सुधार कर दिया है.आपका मन आहात हुआ, इसका मुझे बेहद खेद है. क्षमा प्रार्थी हूँ. शायद आप कुछ कारण पोस्ट में समझ चुकी होगी.

    @बी.एस.पाबला जी, मैं दोनों कोशिश में नाकाम रहा हूँ, क्योंकि तकनीकी और अंग्रेजी में अनाड़ी हूँ. लिंक देने के आपका धन्यवाद!

    @मयंक भरद्वाज जी,आपने"अगर आप अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट लगाना चाहते हो तो वाला लिंक भेजकर बहुत अच्छा किया. उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! अपने सारे ब्लोगों पर मैंने हिंदी का विजेट लगा लिया है और एक समस्या है.इसको मैं टिप्पणी बॉक्स के आसपास ही लगाना चाहता हूँ. ऐसा कई ब्लोगों पर देखा है. क्या ऐसा संभव है तो कैसे? कृपया यह जानकारी भी प्रदान करें.

    अब तक की टिप्पणिकर्त्ताओं का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ.आप अपना प्यार और दुलार इसी प्रकार बनाये रखे.

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  28. रमेश जी,सबसे पहले तो आपके हिंदी प्रेम को hamara नमन .आप जैसे हिंदी premiyon के sath se hi हिंदी का sthan आज देश में विशालता ग्रहण कर रहा है.आप ये न सोचे की ब्लोगर्स जानबूझ कर रोमन में टिप्पणी करते हैं ये सब कुछ तो समय की व् बहुत सी बार तो अंतर्जाल की gadbadi के karan hota है ab आपके blog par ये vijet mila तो dekhiye hamne bhi हिंदी में hi टिपण्णी की .आप sabhi keetippani par dhyan den aur हिंदी के prachar prasar में aise hi jute rahen aisee hamari shubhkamna है.

    उत्तर देंहटाएं
  29. गुस्ताखी माफ़ करें--शालिनी कौशिक ने कहा…रमेश जी,सबसे पहले तो आपके हिंदी प्रेम को हमारा नमन.आप जैसे हिंदी प्रेमियों के साथ से ही हिंदी का स्थान आज देश में विशालता ग्रहण कर रहा है.आप ये न सोचे की ब्लोगर्स जानबूझ कर रोमन में टिप्पणी करते हैं ये सब कुछ तो समय की व बहुत-सी बार तो अंतर्जाल की गड़बड़ी के कारण होता है अब आपके ब्लॉग पर ये विजेट मिला तो देखिये हमने भी हिंदी में ही टिपण्णी की. आप सभी की टिपण्णी पर ध्यान दें और हिंदी के प्रचार-प्रसार में ऐसे ही जुटे रहें ऐसी हमारी शुभकामना है.

    @शालिनी कौशिक जी, हर टिप्पणी पर मेरी हमेशा ही कोशिश रहती हैं.

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  30. रमेश जी आप की बातो से सहमत हूँ एक दो शब्द वाली टिप्पणिया रोमन में लिख देती हूँ .........

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  31. मैं आप की बातो से सहमत हूँ, मुझे भी हिन्दी में ही लिखना अच्छा लगता है.मेरे ब्लॉग पर आने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद........

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  32. ये हुई असली सिरफ़िरे वाली बात एक बार में ही सारे गुणा भाग जोड घटा लगा दिये आगे के लिये भी कुछ बचा लेते?
    आप जैन तो सिर्फ़ जन्म से हो काम से असली सिरफ़िरे हो ऐसे ही लगे रहो।

    उत्तर देंहटाएं
  33. ये अपरुवल का चक्कर हटा दो आने दो सीधा जो जैसा लिखे दूसरे भी तो जाने कौन कया लिखता है?

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  34. bhayi sirfira ji
    sader bandan ,
    aapka hindi prem prashansniya hai . parantu ,sankalp ke sath samarthy nahin hai , hamara takaniki sansar abhi itana unnat nahin hai , videshi website na ho to ,aapke sankalp ke bare men gyat bhi nahin hota / rahi bat hindi ki to
    lipi badalne se nihitarth ,prem ,bhav nahin badalate . koshish karen bharat ak sabal rashtr ho ,sari vidhaon se .....samarth banen gyan ,vigyan arth ke kshetra men ,ekrupata ,sampurnata tabhi aayegi, /

    उत्तर देंहटाएं
  35. रमेश जी आप की बातो से सहमत हूँ मै भी चाहती हूँ की सभी हमेसा हिंदी में लिखे पर कई बार मै भी आलस में एक दो शब्द वाली टिप्पणिया रोमन में लिख देती हूँ. क्यूंकि मुझे भी हिंदी मैं लिखने के लिए जीमेल मैं जाकर हिंदी टाइप करनी पड़ती है. और फिर कॉपी पेस्ट करके लिखना पड़ता है..बड़ा झंझट लगता है..मुझे भी आसान तारीके की तालाश है..यहाँ कुछ महानुभावो ने आसान तरीके सुझाए हैं मैं उन्हें जरुर इस्तेमाल करने की कोशिश करुँगी.
    आभार.

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  36. @भाई जाट देवता (संदीप पवाँर) जी, हमारे भारत देश अच्छी व बुरी मानसिकता के व्यक्ति रहते हैं और कुछ को बदलना आसान नहीं होता है. इसलिए यह "अपरुवल" का चक्कर है. शायद आप जानते होंगे कि-हम अपने प्रकाशन परिवार के समाचार पत्रों के संपादक, मुद्रक और प्रकाशक का दात्विय का निर्वाह करता हूँ/था. कोई भी अच्छी या बुरी बात समाज में सभ्य तरीके से ही जानी चाहिए.

    एक छोटी-सी घटना दो दिन पहले हुए अनुभव से:- इसी पोस्ट पर एक सम्मानित पेशेगत महिला(जो आमआदमी की परेशानियों से रोज रु-ब-रु होती हैं और बहुत अच्छे लेख व कविताओं को अपने दो ब्लोगों पर डालती हैं. मैं स्वंय उनके दोनों ब्लॉग फ्लो भी करता हूँ और टिप्पणी भी करता हूँ. एक-दो बार मेरे ब्लोगों पर उन्होंने टिप्पणी भी की है) की ब्लॉगर आई.डी से अशोभिनीय टिप्पणी प्राप्त हुई है.जिस मैं अपशब्दों का प्रयोग किया हुआ है.जो प्रकाशन योग्य नहीं है.अब यह भी हो सकता है. किसी (शातिर दिमाग के व्यक्ति) ने उनकी ईमेल या ब्लॉग की आई.डी को हैग कर लिया हो और उनको बदनाम करने की कोशिश कर रहा हो.अब जब तक उनसे (ब्लॉगर) से संपर्क नहीं हो जाता है.तब तक कुछ कहना मेरे लिए उचित नहीं होगा.एक सच्चे और ईमानदार पत्रकार का फर्ज है कि-हर बात पूरी ईमानदारी से समाज को अवगत कराये.मैं अपनी की गई गलतियों पर की गई आलोचनात्मक टिप्पणियों से विचलित नहीं होता हूँ और अपनी गलतियों को स्वीकार करता हूँ.फिर गलती किससे नहीं होती हैं और फ़िलहाल मेरी दिमागी स्थिति से सभी दोस्त व पाठक अवगत भी हैं.क्या आपको लगता है मेरे ब्लॉग का उद्देश्य सम्मनित लोगों को बदनाम करने का हैं.मैंने अपने ब्लॉग को लोगों को जागरूक करने और अन्याय का विरोध करने के उद्देश्यों के चलते ही बनाया है.मेरे ब्लॉग से एक भी व्यक्ति का कुछ भी भला हो जाए तो मैं खुद खुशनसीब मानूंगा.अब आप भी एक बार मुझे "सिरफिरा" कह दीजिये..........................आपका दोस्त

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  37. गुस्ताखी माफ़ करें:-उदयवीर सिंह ने कहा…भाई सिरफिरा जी-सदर वंदन,
    आपका हिंदी प्रेम प्रशंसनीय है.परन्तु,संकल्प के साथ सामर्थ्य नहीं है,हमारा तकनीकी संसार अभी इतना उन्नत नहीं है,विदेशी वेबसाइट न हो तो,आपके संकल्प के बारे में ज्ञात भी नहीं होता.रही बात हिंदी की तो लिपि बदलने से निहितार्थ,प्रेम,भाव नहीं बदलते. कोशिश करें भारत एक सबल राष्ट्र हो,सारी विधाओं से.....समर्थ बनें ज्ञान,विज्ञान अर्थ के क्षेत्र में,एकरूपता,सम्पूर्णता तभी आएगी.

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  38. @भाई उदयवीर सिंह जी,आपकी टिप्पणी में व्यक्त विचारों से सहमत हूँ.मगर क्या विदेशों लोग नग्न घूमते हैं तो हम नग्न घूमें.

    मेरा विचार है कि-अगर विदेशों ने कुछ अच्छी चीज़ बनाई हैं.तब हमें अपने विवेक का प्रयोग करके भारत देश को समृध्द बनाने का प्रयास करना चाहिए.हमारे देश के स्वार्थी और दिवालिया मानसिकता के नेता अपनी मानसिकता को देश और समाजहित में बदल लें तो मैं नहीं मानता कि-हमारे देश में ऐसी कोई चीज़ नहीं जिसका निर्माण नहीं हो सकता जो विदेशी देशों में निर्माण हो रहा है.सिर्फ हमारे देश में मौजूद प्रतिभाओं को पहचाने और उनका पलायन रोकने की आवश्कता है.बस देश को चाहिए देश को समाज और देशहित में अच्छी विचारधारा के नेताओं की.

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  39. हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है और उसका सम्मान करना हमारा पहला कर्तव्य है --आपका धन्यवाद ...कृपया सभी ये विजेट लगाए ..

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  40. श्रीमान जी, मैंने भी अपने ब्लॉग पर हिंदी लिखने वाला "विजेट" लगाया है. इससे काफी हिंदी प्रेमी और स्वंय मैं भी काफी लाभ प्राप्त हो रहा है. मुझे भी मेरी पोस्ट "आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें" पर श्री मयंक भारद्वाज ने सिखाया है. अगर आप भी चाहे तो आप भी लगा सकते हैं. मैं पहले अपने ब्लॉग की "डिज़ाईन" पर गया फिर एक नया "गजेट" में "जावास्क्रिप्ट" को चुनकर सबसे ऊपर वाली लाईन में "आईये! हम अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी में टिप्पणी लिखकर भारत माता की शान बढ़ाये" लिखा और नीचे निम्नलिखित कोड को पेस्ट करके "सेव" कर दिया. आप और बाकी हिंदी प्रेमी जिनको जानकारी नहीं है. वो भी इसका प्रयोग करें और हिंदी के प्रचार-प्रसार में योगदान करें.

    श्रीमान जी, माफ़ी चाहता हूँ कोड तकनीकी कारणों से यहाँ पेस्ट करने के बाद भी नहीं जा रहा हैं. अगर किसी ब्लॉगर को कोड चाहिए तो मैं ईमेल करा दिया करूँगा. आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें

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  41. मैं हमेशा ये कोशिश करती हूँ कि हिंदी में ही टिपण्णी दे सकूँ! मुझे हिंदी में लिखना बहुत अच्छा लगता है! मेरे ब्लॉग पर आते रहिएगा!

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  42. रमेश जी बहुत अच्छा लगा आप का हिन्दी प्रेम काश सारे भारत वासी इस बात को समझते, ओर पुरे देश मे अपनी भाषा मे ही काम हो सरकारी ओर असरकारी तो कितना अच्छा हो, आप की कोशिश कामयाब हो, मेरी शुभकामनाऎ.

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  43. भाई आज तक तो हिन्दी पढने के लिये विजेड की जरुरत पडी नहीं टिप्पणी चाहे अंग्रेजी में आई हो या रोमन में । कुछ टाईम अधिक लगाकर पढने में आ ही जाती है ।

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  44. दोस्तों, आज मैंने ऑरकुट(Ramesh kumar sirfiraa)और फेसबुक(Ramesh kumar sirfiraa)पर भी देवनागरी की लिपि हिंदी में वार्तालाप करनी सीख ली है और उन्होंने इस अनाड़ी को यू-टुब पर विडियों भी लोड करनी सिखाने के लिए अपने मोबाईल से पूरे ४१ मिनट तक बात करके जिस प्रकार से सहायता की है.उसके लिए भाई शाहनवाज़ जी का धन्यवाद करता हूँ. भगवान महावीर स्वामी से प्रार्थना करूँगा. उनके घर-व्यापार में सुख-समृध्दि दें.

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अपने बहूमूल्य सुझाव व शिकायतें अवश्य भेजकर मेरा मार्गदर्शन करें. आप हमारी या हमारे ब्लोगों की आलोचनात्मक टिप्पणी करके हमारा मार्गदर्शन करें और हम आपकी आलोचनात्मक टिप्पणी का दिल की गहराईयों से स्वागत करने के साथ ही प्रकाशित करने का आपसे वादा करते हैं. आपको अपने विचारों की अभिव्यक्ति की पूरी स्वतंत्रता है. लेकिन आप सभी पाठकों और दोस्तों से हमारी विनम्र अनुरोध के साथ ही इच्छा हैं कि-आप अपनी टिप्पणियों में गुप्त अंगों का नाम लेते हुए और अपशब्दों का प्रयोग करते हुए टिप्पणी ना करें. मैं ऐसी टिप्पणियों को प्रकाशित नहीं करूँगा. आप स्वस्थ मानसिकता का परिचय देते हुए तर्क-वितर्क करते हुए हिंदी में टिप्पणी करें.

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मार्मिक अपील-सिर्फ एक फ़ोन की !

मैं इतना बड़ा पत्रकार तो नहीं हूँ मगर 15 साल की पत्रकारिता में मेरी ईमानदारी ही मेरी पूंजी है.आज ईमानदारी की सजा भी भुगत रहा हूँ.पैसों के पीछे भागती दुनिया में अब तक कलम का कोई सच्चा सिपाही नहीं मिला है.अगर संभव हो तो मेरा केस ईमानदारी से इंसानियत के नाते पढ़कर मेरी कोई मदद करें.पत्रकारों, वकीलों,पुलिस अधिकारीयों और जजों के रूखे व्यवहार से बहुत निराश हूँ.मेरे पास चाँदी के सिक्के नहीं है.मैंने कभी मात्र कागज के चंद टुकड़ों के लिए अपना ईमान व ज़मीर का सौदा नहीं किया.पत्रकारिता का एक अच्छा उद्देश्य था.15 साल की पत्रकारिता में ईमानदारी पर कभी कोई अंगुली नहीं उठी.लेकिन जब कोई अंगुली उठी तो दूषित मानसिकता वाली पत्नी ने उठाई.हमारे देश में महिलाओं के हितों बनाये कानून के दुरपयोग ने मुझे बिलकुल तोड़ दिया है.अब चारों से निराश हो चूका हूँ.आत्महत्या के सिवाए कोई चारा नजर नहीं आता है.प्लीज अगर कोई मदद कर सकते है तो जरुर करने की कोशिश करें...........आपका अहसानमंद रहूँगा. फाँसी का फंदा तैयार है, बस मौत का समय नहीं आया है. तलाश है कलम के सच्चे सिपाहियों की और ईमानदार सरकारी अधिकारीयों (जिनमें इंसानियत बची हो) की. विचार कीजियेगा:मृत पत्रकार पर तो कोई भी लेखनी चला सकता है.उसकी याद में या इंसाफ की पुकार के लिए कैंडल मार्च निकाल सकता है.घड़ियाली आंसू कोई भी बहा सकता है.क्या हमने कभी किसी जीवित पत्रकार की मदद की है,जब वो बगैर कसूर किये ही मुसीबत में हों?क्या तब भी हम पैसे लेकर ही अपने समाचार पत्र में खबर प्रकाशित करेंगे?अगर आपने अपना ज़मीर व ईमान नहीं बेचा हो, कलम को कोठे की वेश्या नहीं बनाया हो,कलम के उद्देश्य से वाफिक है और कलम से एक जान बचाने का पुण्य करना हो.तब आप इंसानियत के नाते बिंदापुर थानाध्यक्ष-ऋषिदेव(अब कार्यभार अतिरिक्त थानाध्यक्ष प्यारेलाल:09650254531) व सबइंस्पेक्टर-जितेद्र:9868921169 से मेरी शिकायत का डायरी नं.LC-2399/SHO-BP/दिनांक14-09-2010 और LC-2400/SHO-BP/दिनांक14-09-2010 आदि का जिक्र करते हुए केस की प्रगति की जानकारी हेतु एक फ़ोन जरुर कर दें.किसी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी हेतु मुझे ईमेल या फ़ोन करें.धन्यबाद! आपका अपना रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

क्या आप कॉमनवेल्थ खेलों की वजह से अपने कर्त्यवों को पूरा नहीं करेंगे? कॉमनवेल्थ खेलों की वजह से अधिकारियों को स्टेडियम जाना पड़ता है और थाने में सी.डी सुनने की सुविधा नहीं हैं तो क्या FIR दर्ज नहीं होगी? एक शिकायत पर जांच करने में कितना समय लगता है/लगेगा? चौबीस दिन होने के बाद भी जांच नहीं हुई तो कितने दिन बाद जांच होगी?



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