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गुरुवार, मार्च 28, 2013

अग्रवाल समाज द्वारा होली मंगल मिलन समारोह

नई दिल्ली :- गत दिन - बुधवार, दिनांक 27/03/2013 को दोपहर तीन बजे से छह बजे तक एस-40/41, परमपुरी, नजदीक शिव मंदिर, उत्तम नगर, नई दिल्ली-59 में "अग्रवाल समाज, उत्तम नगर (रजि.) द्वारा आयोजित आपसी भाईचारे का प्रतीक "होली मंगल मिलन समारोह" संपन्न हुआ.
 
 
 
 

जिसमें अग्रवाल व जैन समाज के गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की. इस मौके पर संस्था के महामंत्री नरेश अग्रवाल, प्रधान जगदीश बंसल, अशोक बंसल, सुरेश गर्ग, संजय अग्रवाल, सुरेश डालमिया, रवि जैन, पवन गर्ग, कृष्णशरण जिंदल, हरि किशन गोयल, रामधन जिंदल, पवन सिंगला आदि सहित भाजपा के पवन शर्मा और पूर्व पार्षद श्रीमती सरिता जिंदल, सुनील जिंदल शामिल हुए. इस अवसर संस्था ने सभी विशेष आमंत्रित व मुख्य अतिथिगणों सहित अपने पूर्व प्रधान व महामंत्रियों का चादर ओढाकर और पगड़ी पहनाकर सम्मान किया. 
 
 

इस अवसर पर भगवान श्री कृष्ण-राधा जी के गायिका सविता राघव द्वारा गाए कर्ण प्रिय गीतों की धुन पर उपस्थित व्यक्तियों ने फूलों की होली खेलते हुए झूम-झूमकर नाचें और संगीतमयी रंगारंग प्रस्तुति "साहित्य कला परिषद" के कलाकारों द्वारा कई प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हुआ. 

कार्यक्रम देखने आये सभी आमंत्रित सभी मेहमानों के लिए जलपान की व्यवस्था के साथ ही प्रसाद रूपी गुंजिया की विशेष व्यवस्था की हुई थी. कार्यक्रम के कुछ चुनिन्दा पलों की वीडियो नीचे दिए लिंकों पर क्लिक करके देखें. 

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मार्मिक अपील-सिर्फ एक फ़ोन की !

मैं इतना बड़ा पत्रकार तो नहीं हूँ मगर 15 साल की पत्रकारिता में मेरी ईमानदारी ही मेरी पूंजी है.आज ईमानदारी की सजा भी भुगत रहा हूँ.पैसों के पीछे भागती दुनिया में अब तक कलम का कोई सच्चा सिपाही नहीं मिला है.अगर संभव हो तो मेरा केस ईमानदारी से इंसानियत के नाते पढ़कर मेरी कोई मदद करें.पत्रकारों, वकीलों,पुलिस अधिकारीयों और जजों के रूखे व्यवहार से बहुत निराश हूँ.मेरे पास चाँदी के सिक्के नहीं है.मैंने कभी मात्र कागज के चंद टुकड़ों के लिए अपना ईमान व ज़मीर का सौदा नहीं किया.पत्रकारिता का एक अच्छा उद्देश्य था.15 साल की पत्रकारिता में ईमानदारी पर कभी कोई अंगुली नहीं उठी.लेकिन जब कोई अंगुली उठी तो दूषित मानसिकता वाली पत्नी ने उठाई.हमारे देश में महिलाओं के हितों बनाये कानून के दुरपयोग ने मुझे बिलकुल तोड़ दिया है.अब चारों से निराश हो चूका हूँ.आत्महत्या के सिवाए कोई चारा नजर नहीं आता है.प्लीज अगर कोई मदद कर सकते है तो जरुर करने की कोशिश करें...........आपका अहसानमंद रहूँगा. फाँसी का फंदा तैयार है, बस मौत का समय नहीं आया है. तलाश है कलम के सच्चे सिपाहियों की और ईमानदार सरकारी अधिकारीयों (जिनमें इंसानियत बची हो) की. विचार कीजियेगा:मृत पत्रकार पर तो कोई भी लेखनी चला सकता है.उसकी याद में या इंसाफ की पुकार के लिए कैंडल मार्च निकाल सकता है.घड़ियाली आंसू कोई भी बहा सकता है.क्या हमने कभी किसी जीवित पत्रकार की मदद की है,जब वो बगैर कसूर किये ही मुसीबत में हों?क्या तब भी हम पैसे लेकर ही अपने समाचार पत्र में खबर प्रकाशित करेंगे?अगर आपने अपना ज़मीर व ईमान नहीं बेचा हो, कलम को कोठे की वेश्या नहीं बनाया हो,कलम के उद्देश्य से वाफिक है और कलम से एक जान बचाने का पुण्य करना हो.तब आप इंसानियत के नाते बिंदापुर थानाध्यक्ष-ऋषिदेव(अब कार्यभार अतिरिक्त थानाध्यक्ष प्यारेलाल:09650254531) व सबइंस्पेक्टर-जितेद्र:9868921169 से मेरी शिकायत का डायरी नं.LC-2399/SHO-BP/दिनांक14-09-2010 और LC-2400/SHO-BP/दिनांक14-09-2010 आदि का जिक्र करते हुए केस की प्रगति की जानकारी हेतु एक फ़ोन जरुर कर दें.किसी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी हेतु मुझे ईमेल या फ़ोन करें.धन्यबाद! आपका अपना रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

क्या आप कॉमनवेल्थ खेलों की वजह से अपने कर्त्यवों को पूरा नहीं करेंगे? कॉमनवेल्थ खेलों की वजह से अधिकारियों को स्टेडियम जाना पड़ता है और थाने में सी.डी सुनने की सुविधा नहीं हैं तो क्या FIR दर्ज नहीं होगी? एक शिकायत पर जांच करने में कितना समय लगता है/लगेगा? चौबीस दिन होने के बाद भी जांच नहीं हुई तो कितने दिन बाद जांच होगी?



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