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बुधवार, जून 25, 2014

सुंदर चेहरा दिखाओ प्रतियोगिता की मालिकन फेसबुक

सुंदर चेहरा दिखाओ प्रतियोगिता की मालिकन फेसबुक (चेहरे की किताब) पर दोस्तों मैं अपने विचारों का लेखन (कुछ हीरे-मोती समान कीमती शब्दों का खजाना लुटाना) करके बस कुछ यह ही मंथन (कुछ सार्थक विचार देने का दृढ निश्चय, क्योंकि शरीर मर जाता है मगर विचार हमेशा जिन्दा रहते हैं) कर पाया हूँ जिनको आप इस लिंक https://www.facebook.com/sirfiraa/notes पर पढ़ सकते हैं


1. भारत माता फिर मांग रही है क़ुर्बानी पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 16 जनवरी 2011

2. कंप्यूटर बेचते समय कहने को कम्पनी और डीलर कहता हैं कि-24 घंटे में घर पर ही सर्विस देंगे. पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 5 अगस्त 2011

3. जनहित में एक बहुमूल्य संदेश:-पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा ·14 अगस्त 2011

4. तीर्थंकर महावीर स्वामी जी ग्रुप के पाठकों, लेखकों और टिप्पणिकर्त्ताओं के नाम एक बहुमूल्य संदेश  पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 12 सितंबर 2011

5. कागज के रावण मत फूकों, जिन्दा रावण बहुत पड़े हैं पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 6 अक्टूबर 2011

6. क्या आदमी को बुजदिलों की मौत मरना चाहिए या वीरों की ? पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 17 अक्टूबर 2011

7. मांगे मिले नहीं भीख, बिन मांगे मोती मिले पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 5 दिसंबर 2011 

8. दोस्तों की संख्या में विश्वास करते हो या उनकी गुणवत्ता पर ? पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 13 दिसंबर 2011

9. भारत देश की मांओं और बहनों के नाम एक अपील पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 21 दिसंबर 2011

10. क्या उसूलों पर चलने वालों का कोई घर नहीं होता है ? पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 24 दिसंबर 2011

11. सिरफिरा-दोस्त के नाम पर कलंक है पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 6 जनवरी 2012

12. हम कौन है ? पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 21 सितंबर 2012

13. मित्रता के दौर में स्वागत है आपका पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 23 सितंबर 2012

14. यदि फेसबुक की अपनी प्रोफाइल में हिन्दी में नाम लिखना हो तो ऐसे करें. पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 27 सितंबर 2012

15. क्या खास इन वेबसाइट्स में जो इन्हें हर रोज देखते हैं अरबों लोग पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 15 अक्टूबर 2012

16. आज हमारा जन्मदिन है. पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 19 अक्टूबर 2012

17. केबल ऑपरेटरों और सरकार की गुंडागर्दी से कौन बचायेगा ? पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 24 अक्टूबर 2012

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19. कितना जानते हैं आप अपने मोबाईल के बारें में पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 9 अप्रैल 2013

20. आलोचना के फूल तो ठीक हैं, कांटों से निपटना होगा पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 11 अप्रैल 2013

21. आप मुझे वोट दो, मैं तुम्हारे अधिकारों के लिए अपना खून बहा दूंगा ! पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 11 मई 2013

22. यह था मेरा चुनावी घोषणा-पत्र पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 15 मई 2013

23. पत्रकार भी अपने आचरण में सुधार लाए पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 1 जून 2013

24. आप मुझे वोट दो, मैं तुम्हारे अधिकारों के लिए अपना खून बहा दूंगा ! (भाग-दो) पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 2 जून 2013

25. सिम से हमेशा के लिए डिलीट हो चुके मोबाइल नंबर्स कैसे पाएं पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 16 जून 2013

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28. अपनाएं यह सिंपल उपाय चोरी हुए मोबाइल को खोजें ! पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 3 जुलाई 2013

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55. गीतों के लिंक से सजा एक लेख -‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा..’ (‘फादर्स-डे’ पर विशेष लेख) पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा · 17 जून 2014

56. कुछ यात्राएँ निराशाजनक भी साबित होती है पत्रकार रमेश कुमार निर्भीक द्वारा ·26 जून 2014
जैसा मैंने अपनी पिछली एक पोस्ट में भी लिखा था कि-मुझे ऐसा लगता है कि मेरा फेसबुक पर आना (कोई लगभग पांच साल पहले प्रवेश हुआ था) सफल हो गया. मैं यहाँ (फेसबुक) पर अपने विचारों का लेखन (कुछ हीरे-मोती समान कीमती शब्दों का खजाना लुटाना) और दूसरों के विचारों का अध्ययन (कुछ हीरे-मोती समान कीमती शब्दों का खजाना एकत्रित करना) करके कुछ मंथन (कुछ सार्थक विचार देने का दृढ निश्चय, क्योंकि शरीर मर जाता है मगर विचार हमेशा जिन्दा रहते हैं) करने के लिए आया हूँ/था और समय-समय पर किसी जरूरतमंद की मदद करने का मुझे सौभाग्य भी मिला. जो पहले में अपने प्रकाशन "शकुंतला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन" परिवार के अख़बारों "जीवन का लक्ष्य (पाक्षिक) शकुंतला टाइम्स (मासिक), शकुंतला सर्वधर्म संजोग (मासिक),शकुंतला के सत्यवचन (साप्ताहिक), उत्तम बाज़ार (त्रैमासिक)" के माध्यम से करता था. जिनको मैंने देश व समाज को समर्पित किया हुआ है. जिसे काफी लोग "समाजसेवा" का नाम भी देते है. इसलिए अपने दैनिक दिनचर्या के कार्य खत्म होने के बाद मेरा काफी समय सोशल वेबसाईट पर ही बीतता है.


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मार्मिक अपील-सिर्फ एक फ़ोन की !

मैं इतना बड़ा पत्रकार तो नहीं हूँ मगर 15 साल की पत्रकारिता में मेरी ईमानदारी ही मेरी पूंजी है.आज ईमानदारी की सजा भी भुगत रहा हूँ.पैसों के पीछे भागती दुनिया में अब तक कलम का कोई सच्चा सिपाही नहीं मिला है.अगर संभव हो तो मेरा केस ईमानदारी से इंसानियत के नाते पढ़कर मेरी कोई मदद करें.पत्रकारों, वकीलों,पुलिस अधिकारीयों और जजों के रूखे व्यवहार से बहुत निराश हूँ.मेरे पास चाँदी के सिक्के नहीं है.मैंने कभी मात्र कागज के चंद टुकड़ों के लिए अपना ईमान व ज़मीर का सौदा नहीं किया.पत्रकारिता का एक अच्छा उद्देश्य था.15 साल की पत्रकारिता में ईमानदारी पर कभी कोई अंगुली नहीं उठी.लेकिन जब कोई अंगुली उठी तो दूषित मानसिकता वाली पत्नी ने उठाई.हमारे देश में महिलाओं के हितों बनाये कानून के दुरपयोग ने मुझे बिलकुल तोड़ दिया है.अब चारों से निराश हो चूका हूँ.आत्महत्या के सिवाए कोई चारा नजर नहीं आता है.प्लीज अगर कोई मदद कर सकते है तो जरुर करने की कोशिश करें...........आपका अहसानमंद रहूँगा. फाँसी का फंदा तैयार है, बस मौत का समय नहीं आया है. तलाश है कलम के सच्चे सिपाहियों की और ईमानदार सरकारी अधिकारीयों (जिनमें इंसानियत बची हो) की. विचार कीजियेगा:मृत पत्रकार पर तो कोई भी लेखनी चला सकता है.उसकी याद में या इंसाफ की पुकार के लिए कैंडल मार्च निकाल सकता है.घड़ियाली आंसू कोई भी बहा सकता है.क्या हमने कभी किसी जीवित पत्रकार की मदद की है,जब वो बगैर कसूर किये ही मुसीबत में हों?क्या तब भी हम पैसे लेकर ही अपने समाचार पत्र में खबर प्रकाशित करेंगे?अगर आपने अपना ज़मीर व ईमान नहीं बेचा हो, कलम को कोठे की वेश्या नहीं बनाया हो,कलम के उद्देश्य से वाफिक है और कलम से एक जान बचाने का पुण्य करना हो.तब आप इंसानियत के नाते बिंदापुर थानाध्यक्ष-ऋषिदेव(अब कार्यभार अतिरिक्त थानाध्यक्ष प्यारेलाल:09650254531) व सबइंस्पेक्टर-जितेद्र:9868921169 से मेरी शिकायत का डायरी नं.LC-2399/SHO-BP/दिनांक14-09-2010 और LC-2400/SHO-BP/दिनांक14-09-2010 आदि का जिक्र करते हुए केस की प्रगति की जानकारी हेतु एक फ़ोन जरुर कर दें.किसी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी हेतु मुझे ईमेल या फ़ोन करें.धन्यबाद! आपका अपना रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा"

क्या आप कॉमनवेल्थ खेलों की वजह से अपने कर्त्यवों को पूरा नहीं करेंगे? कॉमनवेल्थ खेलों की वजह से अधिकारियों को स्टेडियम जाना पड़ता है और थाने में सी.डी सुनने की सुविधा नहीं हैं तो क्या FIR दर्ज नहीं होगी? एक शिकायत पर जांच करने में कितना समय लगता है/लगेगा? चौबीस दिन होने के बाद भी जांच नहीं हुई तो कितने दिन बाद जांच होगी?



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